क्या अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ने वाली है या फिर ये है कुछ और?

सालभर पहले तक अमेरिका और उत्तर कोरिया एक दूसरे के आमने-सामने जंग-ए-मैदान जैसे थे। दुनिया भर को डर लगा था कि मानो सच में परमाणु युद्ध शुरू ना हो जाएगा। मगर सब शांत हो गया। मानो कोई अशांति के पहले कि शांती हो और सच में हुआ भी कुछ ऐसे ही. क्योंकि अमेरिका एक बार फिर अशांत हो उठा है। पर इस बार निशाने पर उत्तर कोरिया पर नहीं बल्कि ईरान था।

जी हां अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव लगातार फिर बढ़ते जा रहे हैं। साल 2015 में अमेरिका ने ईरान परमाणु समझौते से खुद को अलग-थलग कर लिया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा कर दबाव बनाया। लेकिन, ईरान भी अड़ा है, झुकने को तैयार नहीं।अप्रैल 2019 में अमेरिका ने उसके खिलाफ एक के बाद एक कई और बड़े फैसले भी लेने शुरु कर दिए। इनके बाद से इन दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है।

अमेरिका और ईरान कि विश्वस्तरिय लड़ाई को 2D में देखने के लिए इस वीडियों को जरुर देेखें।

1-पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए ईरान की सेना – ‘रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर’ को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया।

2-इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप ईरान ने भी अपनी संसद में अमेरिकी सेना को आतंकी संगठन बताने वाला बिल पास कर दिया। कुछ ही दिन बीते थे कि अमेरिका ने ईरान को झटका देते हुए उन आठ देशों के भी उससे तेल खरीदने पर रोक लगा दी जिन्हें बीते साल छूट दी गई थी।

3-इस दौरान अमेरिका ने ईरान के धातु निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद 5 मई 2019 को उसने ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए उसके आसपास के क्षेत्रों में बमवर्षक विमानों की तैनाती कर दी।

जंगी विमानों की तैनाती की घोषणा करते हुए अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन का कहना था-“मध्य पूर्व से लगातार चेतावनी भरे संकेत मिल रहे हैं जिनसे युद्ध छिड़ने का अनुमान लगाया जा सकता है। ख़ास तौर पर ईरान के साथ।इसीलिए ये तैनाती की जा रही है ताकि ईरान को स्पष्ट संकेत दिया जा सके कि वो अमेरिका या उसके सहयोगी देशों के प्रतिष्ठानों पर हमले की ग़लती न करे। हम ईरान के साथ हर तरह की लड़ाई को तैयार हैं।”

अमेरिका के इस रुख के बाद ईरान ने भी एक बड़ा फैसला ले लिया। उसने घोषणा की कि वो अमेरिका की इन हरकतों के बाद अब 2015 के परमाणु समझौते की शर्तों का पालन नहीं करेगा। ईरान ने कहा कि उसने यूरेनियम और भारी जल के उत्पादन को बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस सबसे ऐसा माहौल बन गया है कि अमेरिका ने इराक के बग़दाद में स्थित अपने वाणिज्यिक दूतावास के कर्मचारियों को अमेरिका वापस लौटने का आदेश दे दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान के साथ बढ़ते तनाव के मद्देनज़र ये कदम उठाया गया है।

हालंही में इस विवाद को और हवा मिली जब 13 करोड़ अमेरिकी डॉलर यानी करीब 696 करोड़ रुपए की कीमत वाले मानवरहित ग्लोबल हॉक MQ-4C ट्रटॉन निगरानी ड्रोन ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसकर जासूसी की कोशिश कर रहा था और तभी बिना वक्त गंवाए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने रेडार गाइडेड मिसाइल से उसे मार गिराया था। अपने सबसे मॉडर्न और शक्तिशाली ड्रोन के मार गिराए जाने से अमेरिका और भी तिलमिला उठा है। लेकिन इससे पहले कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई धमकी देता। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की तरफ से एक बयान जारी हुआ- “अमेरिका हमें हलके में ना ले हम अपनी सीमाओं की हिफ़ाज़त करना जानते हैं।”

अमेरिका को इस बात का इल्म तो है कि मौजूदा वक्त में इस तेवर से उसके खिलाफ बात करने की हिम्मत रूस और चीन के बाद ईरान में तो है, मगर वो उसके इस एडवांस ड्रोन को भी मार गिराएगा जिसे बिना रेडार गाइडेड मिसाइल के नहीं गिराया जा सकता। ये उम्मीद उसे नहीं थी। लिहाज़ा अमेरिका ने ईरान को जवाब देने के लिए युद्ध की पहली नीति अपनाई और कहा कि- “हमारा ड्रोन अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में था ना कि ईरानी हवाई क्षेत्र में”। मगर ईरान ने बिना देर किए उसकी इस नीति को एक वीडियो जारी कर फेल कर दिया। जिसमें ईरानी राडार में अमेरिकी ड्रोन उसकी हवाई सीमा में प्रवेश करता हुआ साफ दिख रहा है।

जहां अमेरिका ईरान को सबक सिखाने की धमकी दे चुका है, वहीं रूस ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला बोला तो इसका अंजाम खौफनाक होगा क्योंकि वो चुप नहीं बैठेगा। बहरहाल, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ईरान से सुलह की कोशिश में जुटे हुए हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका के ट्रंप, 2020 के  चुनावी मैदान में हैं। ईरान पर हमला कर अमेरिकी वोटर को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर एकजुट कर वो फिर से चुनाव जीतना चाहते हैं, बस इसीलिए ईरान का मुद्दा भुनाया जा रहा है। हालांकि जिस तर्क के साथ ट्रंप ईरान के खिलाफ खड़े हैं, उस तर्क को उनके अपने ही दोस्ती वाले देश गलत ठहरा रहे हैं। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बीते महीनों में जो कुछ भी हुआ है उसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान में होगी जंग या फिर ये चुनावी माहौल के लिए कोई साजिश चलाई जा रही है।?

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