जानिए क्या होता है फिस्कल डेफिसिट (वित्तीय घाटा)?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण अपने बजट भाषण में जिस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल किया वो वित्तीय घाटा यानी फिस्कल डेफिसिट था। जिसपर देश के कारोबारियों के साथ-साथ शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों की भी नज़र रहती है।

फिस्कल डेफिसिट (वित्तीय घाटा) क्या होता है-अगर आसान भाषा में कहे तो सरकार जितना कमाती है। मतलब जो भी पैसा टैक्स और अन्य चीजों पर वसूलती है। वहीं, उससे ज्यादा खर्च कर देती है। कमाई कम और ज्यादा खर्च के बीच जो अंतर आता है, उसे वित्तीय घाटा कहते हैं।

वो कहते हैं ना आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया जब ऐसी हालत सरकार पर आती है तो, सरकार करती है जुगाड़…चलिए जानते है इसके बारे में विस्तार से।

सरकार कैसे करती है वित्ती घाटे की भरपाई- एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सरकार उधार लेकर, विदेशी निवेशकों से पैसा लेकर, बॉन्ड या सिक्योरिटीज जारी करके सरकार इस वित्तीय घाटे की भरपाई कर लेती है। इन नीतियों के विरोध में ही रघुराम राजन और उर्जित पटेल, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नरों ने अपने पद छोड़े थे।

वित्तीय घाटे के बढ़ने से-वित्तीय घाटे के बढ़ने का मतलब है कि सरकार की उधारी बढ़ेगी और अगर उधारी बढ़ेगी तो सरकार को ब्याज भी ज्यादा देना होगा। अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए वित्तीय घाटे को काबू में रखना बेहद जरूरी है। इन लोगों की वित्ती घाटे पर रहती हैं नज़र-पिछले बजट में वित्त मंत्री ने कहा था कि वित्तीय घाटा जीडीपी का 3.3 फीसदी रहेगा।अगर घाटा इसके आसपास रहता है तो ठीक है, लेकिन जरूरत से ज्यादा वित्तीय घाटा होना शेयर बाजार को परेशान करता है। ऐसे में इस आंकड़ें के बाद शेयर बाजार तेज प्रक्रिया देता है।

क्या है फिस्कल कंसॉलिडेशन-सरकार के घाटे और कर्ज को घटाने के उद्देश्य से बनाई जाती हैं नीतियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाला सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला आर्थिक सर्वेक्षण पेश हुआ। ऐसे में फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) शब्द खासा सुर्खियों में है। हालांकि इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, फिस्कल कंसॉलिडेशन (fiscal consolidation) से ऐसी नीतियां जाहिर होती है, जो सरकार के घाटे और कर्ज को घटाने के उद्देश्य से बनाई जाती हैं। इन्हें सरकारी खजाने की स्थिति में सुधार करने के लिए बनने वाली नीतियां भी कहा जा सकता है।

और हां, अगर सरकार अपने राजकोषीय कर्ज के बारे में सही खुलासा करे, तो शायद परिणामस्वरूप एक बड़ा झटका लगे, लेकिन इससे निवेशक, भारत में और विश्वास करने लगेंगे।

 

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