क्या होगा जब कानून सिखाने वाले, कानून का पालन नहीं करते; देखिए “हावर्ड लॉ स्कूल” का ये दिलचस्प किस्सा।

‘हार्वी वाइंस्टीन’ इस नाम से भले ही आप वाकिफ ना हो…लेकिन हालॉवुड में एक वक्त था कि इनकी तूती बोलती थी, लेकिन बाद में इनके कर्मकांड के चलते किस्मत ऐसे पलटी कि राजा से रंक बनते देर ना लगी। कामयाबी के शिखर की उंचाई पर पहुंचने के बाद हॉलीवुड का ये दिग्गज फिल्म प्रोड्यूसर अचानक जमीन पर आ गिरा। दरअसल, इनके खिलाफ एंजेलिना जोली, रॉस मैकगोवन, एशले जुड और ग्वेनेथ पॉल्त्रो जैसी कई बड़ी अभिनेत्रियों ने यौन उत्पीड़न, धमकी और बलात्कार के आरोप इन पर लगे हैं। मेरिल स्ट्रीप, जेनिफर लॉरेंस और केंट विंसलेट जैसी अभिनेत्रियों ने भी वाइंस्टीन की आलोचना की है।  

चलिए अब बात करते है इसी मामले से उजागर हुए एक और किरदार की…रोनाल्ड सुलिवन। सुलिवन का ‘अपराध’ ये है कि इन्होंने हॉलीवुड निर्माता, हार्वी वाइंस्टीन का बचाव किया, वही जिनके बारे में हम आपको शुरुवात में बता चुके हैं।

 ‘हार्वी वाइंस्टीन’, देखते ही देखते #MeToo आंदोलन का चेहरा तब बन गए। जब 80 महिलाओं सहित, प्रसिद्ध फिल्मी सितारों ने भी, 2017 में उनके खिलाफ आवाज़ उठाई। 

‘हार्वी वाइंस्टीन’ का मामला संभालना रोनाल्ड सुलिवन को भारी पड़ा। जी हां…विवादास्पद मुवक्किल का ठेका संभालने के ठीक चार महीने बाद, हार्वर्ड लॉ स्कूल ने सुलिवन और उनकी पत्नी, स्टेफ़नी रॉबिन्सन को उनके पद से निकाल दिया गया, जिस पद पर दोनों ने 10 साल का अपना योगदान दिया था। जिसके बाद पति-पत्नी वकील की इस जोड़ी ने, इतिहास रचा…जब 2009 में वे हार्वर्ड के, पहले अफ्रीकी-अमेरिकी विभाग रखवाले नियुक्त किए गए। 88 साल पुराने विन्थ्रोप हाउस में, हार्वर्ड विद्यार्थी का होस्टल, जहां वो 400 छात्रों के माता-पिता की भूमिका निभाते है; उन्हें करियर के बारे में सलाह देते है और नीजी देखभाल भी करते हैं। सुलिवन का शुरू से ही न्याय के प्रति लगन थी। 1994 में, हार्वर्ड से ग्रेजुएशन करने के बाद, वे केन्या के नए संविधान के लिए, एक मसौदा समिति में शामिल हुए और उनके मानवाधिकार आयोग के साथ भी काम किया। 2005 में जब विनाशकारी तूफान, ‘कैटरीना’ ने न्यू ऑर्लियंस में कैदियों के सारे रिकॉर्ड बर्बाद कर दिए, तब उन्होंने प्रणाली के पुनर्निर्माण में मदद की, जिससे हजारों निर्दोष को रिहाई मिली। वाइंस्टीन की मदद करने पर, उनके कुछ छात्र निराश होकर, कॉलेज में अपने मुंह पर पट्टी लगाली और मौन विरोध प्रदर्शन किया।
“सही काम करो” “सुलिवान को हटाओ”
विद्यार्थियों को सुलिवन ने, 1200 शब्द के एक ई-मेल में अमेरिका में अपराधों की रक्षा का इतिहास बताकर, उनकी चिंताओं को संबोधित करना चाहा।
“…रक्षा वकीलों का कर्तव्य है कि वे “अलोकप्रिय प्रतिवादियों” का प्रतिनिधित्व करें…”
लेकिन छात्र, जो पहले सिर्फ 52 थे, अब अन्य हार्वर्ड छात्रों से युक्त हुए, जो कानून की पढ़ाई नहीं कर रहें थे और जो आपराधिक न्याय की बारिकियों के बारे में अधिकतम अनजान थे। सुलिवन, ताकि वो परिप्रेक्ष्य बेहतर समझ सके, अन्य 17 हाउस रखवालों से मिले। सुलिवन: पिछले 10 सालों से मैंने यौन शोषण से पीड़ित और यौन हमलों के आरोपी, दोनों का प्रतिनिधित्व किया है। यहां क्या अलग है ये वो समझ नहीं सके? एक को छोड़कर सभी ने उनका समर्थन किया। जल्द ही हार्वर्ड लॉ स्कूल के 52 प्रोफेसरों ने भी, समर्थन पत्र लिखा। सुलिवन को छात्रों से भी समर्थन मिला, जिनमें से कई ने विरोध के बाद भी साथ में खाना खाया और उनका मार्गदर्शन लिया और अक्सर उनकी दलीलें सुनने के लिए, अदालत भी आए। जहां 173 छात्रों ने उन्हें हटाने की मांग की, वहीं 1,100 के समूह ने, उनके समर्थन में एक याचिका पर हस्ताक्षर किया। सुलिवन फिर हार्वर्ड के प्रिंसिपल, डीन राकेश खुराना से मिले, जो शायद उदारवादियों से भारी दबाव महसूस कर रहे थे।
खुराना का दावा है, कि जांच से पता चला कि छात्र खुदको असुरक्षित महसूस कर रहे थे, हालांकि सर्वेक्षण के परिणाम सार्वजनिक रूप से कभी दिखाए नहीं गए।

सवाल अब ये उठता है कि क्या सुलिवन को वाइंस्टीन मामला नहीं उठाना चाहिए था? अमरीका के पहले संशोधन के तहत, छात्रों को बोलने की आजादी और आन्दोलन का पूरा अधिकार है। लेकिन ऐसा करने में, उन्होंने छठे संशोधन की भारी अवहेलना की, जो आरोपियों को वकील और निष्पक्ष पंच का हक देता है। 

सुलिवन ने इसके पहले भी कई हाई-फाई केस लड़े हैं।
1998 में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का प्रतिनिधित्व किया, पौला जोन्स के आरोपों के खिलाफ।
2015 में चाकू के साथ उसामा रहीम, एक ISIS चरमपंथी को बोस्टन पुलिस और FBI एजेंट ने गोली मारकर हत्या कर दी, तब सुलिवन ने रहीम के परिवार के तरफ से कानून अधिकारियों से लड़े।
2017 में, उन्होंने न्यू इंग्लैंड पैटरियट्स फुटबॉलर आरोन हर्नांडेज़ का सफलतापूर्वक बचाव किया, जो अपने दोस्त, दो अफ्रीकी-अमरीकी को गोली मारकर हत्या की।कुछ समय बाद, हर्नांडेज़ ने आत्महत्या कर ली। 

लेकिन, सुलिवन…न ही विद्रोही है और न ही कोई फरिश्ता। उन्हें बस अपना काम करने के लिए खलनायक बनाया जा रहा था। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के दैनिक छात्र समाचार पत्र “द हार्वर्ड क्रिमसन” ने वाइंस्टीन के बचाव के लिए सुलिवन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। फिर अपनी धुन बदल दी जब हार्वर्ड के एक अन्य प्रोफेसर. एलन डर्शुविट्ज़ ने वाइंस्टीन मामले को संभाला। जिस बात की खुद डर्शुविट्ज़ ने आलोचना की। पूर्वाग्रह और नज़र में आई जब हार्वर्ड ने अरबपति और यौन शोषण के आरोप में फंसे, जेफरी एपस्टीन* द्वारा दान किए गए रु45 करोड़ रुपए वापस करने से इनकार कर दिया।
अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन और हार्वर्ड ब्लैक लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने हार्वर्ड के खिलाफ आवाज़ उठाई; लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। क्या सुलिवान को किसी और चीज के लिए सजा दी जा रही थी? सुलिवन ने कुछ समय पहले हार्वर्ड के खिलाफ भी केस लड़ा था। जब विद्यालय ने अर्थशास्त्र प्रोफेसर रोलैंड फ्रायर को यौन दुराचार के आरोप से निलंबित किया।
सुलिवन: “…मुझे एहसास है कि इस पद संभालने वाला मैं पहला अफ्रीकी-अमेरिकी हूं। हार्वर्ड दुनिया की माने जाने वाली ‘आइवी-लीग’ लॉ स्कूल में से एक है, जिसकी परंपरा महान मानी जाती है और जिसके पूर्व छात्र हैं बराक ओबामा और सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रूथ बेडर गिन्सबर्ग। 

ये विद्यालय जो आने वाले कल के लिए लीडर तैयार कर रहा है, उन्हें इतना तो सिखाना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत है; खासकर जब उपाय मुश्किल हालात से गुजर रहें हों; जिस काम में हार्वर्ड…विफल रहा।

 

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