महाराष्ट्र: गढ़चिरौली में नक्सलियों ने कमांडो टीम पर किया अटैक, EID ब्लास्ट में 15 जवान शहीद

मई 2019 महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में नक्सलियों के घात लगाकर किए गए हमले में 15 जवान शहीद हो गए। नक्सलियों द्वारा किए गए  EID ब्लास्ट में “क्विक रिस्पॉन्स टीम” को ले जा रहा वाहन चपेट में आ गया। इस हमले में निजी बस ड्राइवर भी मारा गया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस हमले में शहीद जवानों के प्रति शोक प्रकट किया है और कहा है कि हमले के साजिशकर्ता को बख्शा नहीं जाएगा।

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कैसे और कब हुआ ये हमला
गौरतलब है कि नक्सलियों का पीछा करते हुए जवान शहीद हुए। आपको बता दें कि कुरखेड़ा तहसील के दादापुरा गांव में नक्सलियों ने 36 वाहनों को आग लगा दी थी, उसके बाद क्विक रिस्पॉन्स टीम के कमांडो घटनास्थल के लिए रवाना हुए थे। ये कमांडो नक्सलियों का पीछा करते हुए जंबुखेड़ा गांव की एक पुलिया पर पहुंचे, जहां नक्सलियों ने विस्फोट के जरिए जवानों पर हमला कर दिया गढ़चिरौली में ये धमाका घने जंगलों के बीच हुआ। धमाके के बाद पुलिस और नक्सलियों के बीच फायरिंग भी हुई। अभी इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

वजह
माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में शांति पूर्ण और बढ़-चढ़कर हो रहे मतदान से नक्सली भड़के हुए थे, जिसके चलते उन्होंने EID ब्लास्ट को अंजाम दिया। इससे पहले महाराष्ट्र दिवस के मौके पर गढ़चिरौली में ही नक्सलियों ने निजी ठेकेदारों के तीन दर्जन वाहनों को आग लगा दी थी।

C-60 कमांडो टीम कैसे बनीं और कैसे करती है ये काम?
नक्सल खतरों को ध्यान में रखते हुए 1992 में सी-60 फोर्स तैयार की गई थी। इसमें पुलिस फोर्स के 60 जवान शामिल होते हैं। ये काम गढ़चिरौली के तब से एसपी के.पी. रघुवंशी ने किया था। सी-60 में शामिल पुलिसवालों को गुरिल्ला युद्ध के लिए भी तैयार किया जाता है। इनकी ट्रेनिंग हैदराबाद, बिहार और नागपुर में होती है। इस फोर्स को महाराष्ट्र की उत्कृष्ट फोर्स माना जाता है। रोजाना सुबह खुफिया जानकारी के आधार पर ये फोर्स आसपास के क्षेत्र में ऑपरेशन को अंजाम देती है। सी-60 के जवान अपने साथ करीब 15 किलो का भार लेकर चलते हैं, जिसमें हथियार के अलावा, खाना, पानी, फर्स्ट ऐड और बाकी सामान शामिल होता है।

 

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