BCCI में अब चलेगी दादा की ‘दादागिरी’ क्योंकि सौरव गांगुली बने अध्यक्ष।

भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की नई पारी कि शुरूवात हो चुकी है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अगले अध्यक्ष का पद संभाला है। हालंही में बोर्ड के जनरल बॉडी मीटिंग के दौरान आधिकारिक तौर पर गांगुली की नियुक्ति की घोषणा हुई। लेकिन हां उनकी अवधि जुलाई 2020 तक ही होगी। यानी गांगुली का कार्यकाल 9 महीने का ही होगा और उन्हें जुलाई 2020 में पद छोड़ना पड़ेगा, क्योंकि नए संविधान के प्रावधानों के तहत छह साल के कार्यकाल के बाद ‘विश्राम की अवधि’ अनिवार्य मानी जाती है।

हालंकी सौरव गांगुली के अध्यक्ष बनने के बाद पहली AGM के लिए जारी कार्यसूची में बोर्ड ने मौजूदा संविधान में महत्वपूर्ण बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आधारित सुधारों पर असर पड़ेगा। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित नए कानून के मुताबिक बीसीसीबाई या राज्य संघों में तीन साल के कार्यकाल को दो बार पूरा करने वाले पदाधिकारी को तीन साल तक ‘कूलिंग आफ पीरियड’ में रहना होगा।

“कूलिंग ऑफ पीरियड” यानी लगातार 6 सालों तक पदाधिकारी रहने पर, नए BCCI संविधान के तहत, किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ने से पहले, 3 साल का अंतर या ‘कूल ऑफ’ लेना ज़रूरी है।

आपको बता दें कि, 47 साल के सौरव गांगुली ने BCCI की कमान संभालते ही 65 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। जी हां…दरअसल, सौरव गांगुली 65 साल बाद ऐसे पहले टेस्ट क्रिकेटर हैं, जो BCCI के अध्यक्ष पद पर काबिज हुए हैं। इससे पहले टेस्ट क्रिकेटर के तौर पर ‘विज्जी’ के नाम से मशहूर महाराजा कुमार विजयनगरम BCCI के अध्यक्ष बने थे, जिन्होंने 1954 से 1956 तक  पद को संभाला। 

बात BCCI प्रेसिडेंट की करें, तो टेस्ट क्रिकेटर सुनील गावस्कर और शिवलाल यादव भी इस पद पर रहे हैं, लेकिन 2014 में गावस्कर और शिवलाल दोनों अंतरिम अध्यक्ष थे। एन. श्रीनिवासन के बाद उनकी नियुक्ति हुई थी।

इसके साथ ही आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (CoA) का 33 महीने से चला आ रहा शासन भी खत्म हो गया। CoA के पूर्व प्रमुख विनोद राय ने कहा, ‘भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक सौरव गांगुली BCCI के 39वें अध्यक्ष बने।’ BCCI अध्यक्ष पद के लिए गांगुली का नामांकन सर्वसम्मति से हुआ है, जबकि गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह सचिव और उत्तराखंड के महीम वर्मा नए उपाध्यक्ष हैं।

चलिए BCCI के नए पदाधिकारियों पर नजर डालें:
जय शाह, सचिव: 31 साल के जय BCCI के सबसे युवा पदाधिकारी हैं। जो गृहमंत्री अमित शाह के बेटे हैं। जय 2009 से गुजरात क्रिकेट संघ से जुड़े हैं।

अरुण सिंह धूमल, कोषाध्यक्ष: राजनीतिक परिवार से आए अरुण फिलहाल वित्त राज्यमंत्री हैं। ठाकुर को जनवरी 2017 में BCCI अध्यक्ष पद से हटाया गया था। धूमल 2012 से 2015 के बीच हिमाचल क्रिकेट संघ के उपाध्यक्ष रहे जब ठाकुर इसके अध्यक्ष थे। 
जयेश जॉर्ज, संयुक्त सचिव: 50 साल के जार्ज को क्रिकेट प्रशासन का बरसों का अनुभव है जो केरल क्रिकेट संघ के सचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष और अध्यक्ष रहे। वो 2005 से केसीए से जुड़े रहे हैं। 
महिम वर्मा, उपाध्यक्ष: इनके पिता पीसी वर्मा उत्तराखंड क्रिकेट संघ के सचिव रह चुके हैं। महिम सीएयू के संयुक्त सचिव रहे हैं। सितंबर में उन्हें सचिव चुना गया जब संघ को BCCI से मान्यता मिली। 

वैसे गांगुली बंगाल क्रिकेट संघ के सचिव और बाद में अध्यक्ष पद के अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कुछ लक्ष्य तय कर रखे हैं जिनमें प्रशासन को ढर्रे पर लाना और प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों के वेतन में बढोतरी शामिल है। ‘हितों के टकराव’ के नियमों के बीच गांगुली के सामने चुनौती क्रिकेट सलाहकार समिति और राष्ट्रीय चयन समिति में अच्छे क्रिकेटरों को लाने की भी होगी। देखना है कि सौरव इन 9 महिनों में क्या कुछ करने में कामयाब होेते हैं।

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