मुंबई को शंघाई बनाने के बीच “कोस्टल रोड” हिचकोले मार रहा है, जानिए क्या है वजह।

माया नगरी मुंबई में कोस्टल रोड एक सपने के समान है, जिसका बुनियादी ढांचा कई रुकावट के बीच खड़ा है। जी हां समुद्री की बलखाती लहरों के बीच वैदिक रीति-रिवाज से शुरू होने वाली परियोजना को चार साल में पूरा होने की उम्मीद जताई गई थी लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हो सका। करीब 14 किलोमीटर का ये कोस्टल रोड टोल फ्री होगा। इसके बन जाने के बाद प्रिंसेस स्ट्रीट से वर्ली सी लिंक तक बिना किसी सिग्नल के चंद मिनटों में पहुंचा जा सकेगा और फिर सी लिंक से बांद्रा और वर्सोवा तक का सफर तय हो सकेगा।

लेकिन कई विवाद के चलते सुप्रीम कोर्ट  ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल निर्माण कार्य शुरु करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा-“हम कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं करेंगे”। कोर्ट ने ये भी कहा कि- “BMC को ये समुद्री विविधता ध्यान में रखना चाहिए; वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत, आवश्यक अनुमतियां निकाले”।

अब मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होनी है…आपको बता दें, हाईकोर्ट के CRZ क्लीरेंस रद्द करने के बाद से ही कोस्टल रोड परियोजना रूकी पड़ी है।

 जब 2011 में पहली बार BMC ने इसके बारे में सोचा था, तब खर्च ₹5,000 करोड़ जोड़ा गया; मगर कई रुकावटों की वजह से देरी होने के कारण, अब खर्च ₹14,000 करोड़ तक पहुंच गया है। गौरतलब है कि कोस्टल रोड निर्माण की शुरुआत अभी तक हुई भी नहीं, लेकिन परियोजना की लागत में दोगुना इजाफा हो गया है। जानकारों का मानना है कि अगर ये योजना और देरी से शुरू होती है तो इसकी लागत और भी बढ़ सकती है।
इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कर रहे हैं। वे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रख रहे हैं। पक्षकारों का कहना है कि 30 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की शुरुआत 2018 में ही हो गई थी और 2022 तक इस परियोजना को पूरा हो जाना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सिविक निकाय और अन्य को इसकी इजाजत मिलनी चाहिए कि इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा कर लिया जा सके। इस मामले की सुनवाई में जस्टिस एसए बोबड़े और एस एस नाजर शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस स्टे को अस्वीकार कर दिया है जिसमें सीआरजेड क्लियरेंस को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था और कहा था कि याचिका पर सुनवाई इसी साल दिवाली के बाद हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिशरमेन यूनियन, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और निवासियों से जवाब मांगा था। इनसे जुड़ी एक याचिका पर हाई कोर्ट ने कहा था कि- “सीआरजेड की क्लियरेंस रिपोर्ट में खामी है”। आपको बता दें कि BMC “कोई व्यावसायिक शोषण नहीं” करने का वादा कर चुकी है, बल्कि खाली जगहों का इस्तेमाल वे ऐसे करने वाली है; पानी के किनारे 27 एकड़ चलने-फिरने, खेलने की जगह; 141 एकड़ में हरियाली, जॉगर्स पार्क, साइकिल ट्रैक और गाड़ी पार्किंग की व्यवस्था; अमरसन गार्डन, महालक्ष्मी मंदिर और वर्ली सी-फेस क्षेत्र में।

क्या खास है कोस्टल रोड में…. 
*पहला चरण होगा प्रिंसेस स्ट्रीट से वर्ली सी लिंक तक
प्रिंसेस स्ट्रीट, हाजी अली, अमरसंस गार्डन और वर्ली से अंदर-बाहर हो सकेंगे वाहन ऐम्बुलेंस और बसों के लिए होगी अलग लेन।
*9.98 किलोमीटर की होगी कोस्टल रोड
*12,721 करोड़ की लागत
*3.45 किलोमीटर की होगी टनल
*18 एजेंसियों से से ली गई अनुमति
*4 लेन आने के लिए और 4 लेन जाने के लिए
*70 हेक्टेयर का ग्रीन एरिया 
*350 टन ईंधन और 70% समय की बचत

खैर जो भी हो, अब देखना है कि कोस्टल परियोजना कब और कितनी बांधाओं को पार करके शुरु होती है और कब तक बनकर मुंबईकरों के सपनों को साकार करती है। लेकिन हां इसमें इतना तो तय है कि ये जब भी पूरा होगा…इसकी लागत जरुर सोच से परे होगी…और ऐसे में इस लागत की मार भी आम जमता को ही झेलनी है।

 

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