जानिए, क्या है AN 32, कब और कैसे ये हुआ था लापता और एक बड़ा खुलासा?

भारतीय वायुसेना का विमान एएन-32  जो 3 जुन 2019 से लापता था उसका मलबा आखिरकार अरुणाचल के सियांग जिले में 11 जुन 2019 को देखा गया। लेकिन विमान के मलबे तक पहुंचने में काफी समय लग गया। क्योंकि दुर्घटना वाला इलाका काफी ऊंचाई पर और घने जंगलों के बीच स्थित है, जिससे राहत कार्य में दिक्कत आई। गौरतलब है कि एएन 32 विमान ने असम के जोरहाट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर 8 क्रू मेंबर सहित 13 यात्रियों के साथ उड़ान भरी थी।

वायुसेना के लापता AN-32 विमान का सर्च ऑपरेशन कि पूरी खबर को विस्तार से जानने के लिए ये वीडियो जरुर देखें।
(बिस्बो हिन्दी न्यूज़) (AN 32 प्लेन के साथ हुई ये अब तक की पांचवी दुर्घटना है) बाकि के बारे में जानने के लिए ये खबर पढ़े।

ये है AN 32 में सवार शहीदों के नाम
विमान क्रैश (AN 32 Crash) में मरने वालों में विंग कमांडर जीएम चार्ल्स, स्क्वाड्रन लीडर एच विनोद, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एल आर थापा, एमके गर्ग, आशिष तंवर और सुमित मोहंती, वारंट ऑफिसर के के मिश्रा, सार्जेंट अनूप कुमार, कॉर्पोरल शारिन, एयरमैन पंकज सांगवान और एस के सिंह और गैर-लड़ाके राजेश कुमार और पुतली थे।

मलबे की खोज
भारतीय वायुसेना ने बताया कि विमान का मलबा (Wreckage Of AN-32)  एमआई 17 विमान ने ढूंढा। 

आईए जानते है AN-32 के बारे वो बात जो काफी चौकाने वाला है।
भारतीय वायु सेना के रूस निर्मित एएन-32(AN-32) परिवहन विमान के लापता होने के बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मिली जानकारी के मुताबिक एएन-32 में जो एसओएस सिग्नल यूनिट थी, वो 14 साल पुरानी थी। एएन-32 ने ग्राउंड कंट्रोलर्स के साथ हादसे के दिन 1 बजे से कम्यूनिकेट करना बंद कर दिया था। असम के जोरहाट से उड़ान भरने के करीब 33 मिनट बाद ये विमान लापता हो गया। इस विमान में सिंगल इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर(ELT) था। इसे एसएआरबीई-8 कहते हैं जो बिट्रिश फर्म सिग्नेचर इंडस्ट्री द्वारा मैन्यूफैक्चर किया गया था। एसएआरबीई-8 को एएन-32 के कार्गो कंपार्टमेंट में इंस्टाल किया गया था। जिससे ये कठिन परिस्थितियों में सिग्नल भेज सके।

इस विमान के बारे में विस्तार से जाने:
1: AN-32 का पूरा नाम Antonov-32 है। नाटो इसे Cline नाम से पुकारता है।
2: 1976 में पहली बार बने इस विमान की कीमत 15 मिलियन डॉलर है।
3: इस मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में दो इंजन लगे होते हैं।
4: ये विमान 55°C से भी अधिक के तापमान में ‘टेक ऑफ’ कर सकता है और 14, 800 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है।
5: इस विमान में पायलट, को-पायलट, गनर, नेविगेटर और इंजीनियर सहित 5 क्रू-मेंबर होते हैं।
6: इसमें अधिकतम 50 लोग सवार हो सकते हैं।
7: जीपीएस से लैस इस विमान में मौसम की जानकारी देने वाला रडार और मॉडर्न नेविगेशन सिस्टम होता है।
8: AN-32 भारतीय वायुसेना के मध्यम श्रेणी के विमान सेवा के लिए रीढ़ की हड्डी है।
9: भारतीय वायुसेना के बेड़े में इस वक्त करीब 100 AN-32 विमान हैं जो मुख्य तौर पर ट्रांसपोर्ट के काम में लगे हैं।
10: इस वक्त दुनिया में करीब 240 विमान ऑपरेशनल हैं। इस वक्त भारतीय वायुसेना के अलावा श्रीलंका, अंगोला और यूक्रेन की वायुसेना के पास भी ये विमान हैं।
11: ये विमान रूस/यूक्रेन में बनाए जाते हैं। भारतीय वायुसेना के पास यूक्रेन के अपग्रेडेड AN-32 विमानों की खेप है।

इससे पहले भी कई AN-32 विमान हादसे का शिकार हो चुका है।
कब-कब हुआ है हादसा?

25 मार्च 1986, अरब सागर
जामनगर की तरफ सोवियत यूनियन से उड़ान भर रहा एक AN 32 प्लेन अरब सागर में अचानक गायब हो गया। ये प्लेन ओमान और मस्कट के रास्ते भारत आ रहा था। इस प्लेन पर तीन क्रू मेंबर्स और चार यात्री थे। हादसे के बाद ये सात लोग कहां गए और प्लेन का क्या हुआ, कुछ पता नहीं चला। उड़ान के एक घंटे 18 मिनट के बाद ही ये प्लेन गायब हो गया। सर्च ऑपरेशन तो किए गए मगर नतीजा कुछ नहीं निकला।

15 जुलाई 1990, केरल
चेन्नई से तिरुवनंतपुरम के लिए जा रहा प्लेन केरल की पॉन्मुंडी पर्वत श्रृंखला में क्रैश हो गया। प्लेन ने 9 बजे उड़ान भरी थी। एक घंटे के बाद ही ये क्रैश हो गया था। इस हादसे में 11 लोग मारे गए थे। पांच भारतीय वायु सेना कर्मचारी थे और छह आम नागरिक।

10 जून 2009, अरुणाचल प्रदेश
प्लेन मेन्चुका अरूणाचल प्रदेश से उड़ान भर चीन बॉर्डर के पास लापता हो गया। इस दर्दनाक हादसे में 13 लोग मारे गए थे। भारतीय सेना ने कुछ दिनों तक सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन किया। मगर खराब मौसम की वजह से किसी का सुराग नहीं मिलने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बंद कर दिया गया।

22 जुलाई 2016, बंगाल की खाड़ी
चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर अपनी साप्ताहिक ट्रिप के लिए जा रहा AN 32 अपने 29 यात्रियों के साथ रडार से गायब हो गया। पिछले हादसे की तरह इस बार भी यात्रियों का कुछ पता नहीं चला। इस हादसे के तीसरे दिन इंडियन नेवी और भारतीय तट रक्षक ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था। ये इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री रेस्क्यू सर्च ऑपरेशन था। इस सर्च में 16 जहाज, एक पनडुब्बी और छह जहाजों को शामिल किया गया था। प्लेन ने सुबह 8 बजे चेन्नई के तंबारम एयर फोर्स स्टेशन से पॉर्टब्लेयर के लिए उड़ान भरी और 11:45  पर प्लेन पॉर्टब्लेयर में आईएनएस उत्कर्ष इंडियन नेवल एयर स्टेशन पर लैंड करने वाला था। तभी नौ बजकर 12 मिनट पर बंगाल की खाड़ी के ऊपर से प्लेन रडार से गायब हो गया। इसमें 29 यात्रियों में छह क्रू मेंबर्स, 11 इंडियन एयर फोर्स के कर्मचारी, 2 भारतीय सेना के सिपाही, 1 इंडियन नेवी गार्ड, एक इंडियन कोस्ट गार्ड और विशाखापट्टनम से 8 एन ए डी डिफेंस कर्मचारी शामिल थे।

3 जून 2019, अरुणाचल प्रदेश (AN 32 प्लेन के साथ हुई ये अब तक की पांचवी दुर्घटना है)
और अब AN 32 एक बार फिर खो दिया है। प्लेन ने 3 जून को अपने 13 कर्मचारियों के साथ जोरहाट असम से मेन्चुका के लिए उड़ान भरी थी। भारतीय वायुसेना द्वारा बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन किया गया। 11 जून को लापता हुए इस प्लेन का मलबा नज़र आया। अभी बाकी डिटेल्स आनी बाकी हैं। भारतीय वायु सेना ने प्लेन के बारे में जानकारी देने वाले को 5 लाख का इनाम देने का एलान किया था।

चलिए अब आपको बताते हैं भारत में कब, कहां से आया ये प्लेन?
इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 1980 में सोवियत यूनियन, यूक्रेन की एंटोनोव कंपनी से 125 AN 32 प्लेन खरीदे गए थे। जिनमें से 104 प्लेन आज भी प्रयोग किए जा रहें हैं। उस वर्ष यूक्रेन ने अलग-अलग देशों को 205 प्लेन बेचे थे।भारत के अलावा 8 देश आज भी इनका इस्तेमाल कर रहें है। भारत द्वारा खरीदा गया AN 32 प्लेन एक रीईंजन्ड AN 26 है। यानी कि AN 26 के इंजन में बदलाव करके AN 32 का इंजन बना है। AN 32 एक ट्विन ईंजन टर्बोकॉर्प मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है। इसे भारतीय वायुसेना की सेवा में 1984 में शामिल किया गया। इस एयरक्राफ्ट का प्रयोग लद्दाख और उत्तर-पूर्वी दुर्गम इलाकों में सेना को सामान सप्लाई करने के लिए किया जाता है। ये एयरक्राफ्ट गर्म तापमान और ज्यादा ऊंचाई पर अच्छे टेक ऑफ के लिए जाना जाता है। ये प्लेन 27,000 किलो ग्राम वजन के साथ 530 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ उड़ान भरने में माहिर है।

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