पतंजलि के “किम्भो” एप ने किया कमबैक।

योगगुरु रामदेव ने व्हाट्सएप के जवाब में किम्भो एप उतारा था और कुछ घंटे में ही इस एप को गूगल के प्ले स्टोर से हटा दिया गया। एप को लेकर कई सेक्योरिटी एक्सपर्ट ने दावा किया कि इसमें यूजर्स के डेटा की सिक्योरिटी को लेकर कई बड़ी गड़बड़ियां है और डेटा में आसानी से सेंध लगाई जा सकती है। इस विवाद पर बाबा रामदेव ने कहा था कि एप को सेटअप करने में फ्लैगशिप कंपनी पतंजलि को और दो महीने लगेंगे।

बोलो मैसेंजर एप नाम से लॉन्च हुआ किम्भो

दो महीनों बाद ही बोलो मैसेंजर (किम्भो) एप को अपडेट कर दिया गया है जहां यूजर्स इसे कल से ही यानी की 13 जुलाई 2018 से ही एप को मैसेंजर पर देख सकते हैं। एप को सबसे पहले 28 मई को डेवलपर अदिति कमल के जरिए पेज पर रिलीज किया गया था। गौर करने वाली बात ये थी की प्ले स्टोर पर कमल का नाम, ई- मेल आईडी और एड्रेस भी दिख रहा था और ये नहीं भूलना चाहिए कि कमल ने इस एप पर अपना फेस भी लगा रखा था तो वहीं एप की फाउंडर भी अदिति कमल ही थीं।

 

किम्भो एप के फीचर्स 
व्हाट्सऐप की तरह वीडियो कॉलिंग की जा सकेगी। इसके अलावा इस एप के यूजर्स रियल टाइम में टेक्स्ट, मैसेज, वीडियो, फोटो और ऑडियो क्लिप दोस्तों के साथ शेयर कर सकेंगे। इस एप में लोकेशन शेयरिंग का भी फीचर है। एप को लेकर दावा किया गया है कि ये एप पूरी तरह से सुरक्षित है और इसमें विज्ञापन नहीं दिखेंगे।

गूगल प्ले-स्टोर पर किम्भो ऐप के डेवलपर का एड्रेस भी पतंजिल आयुर्वेद लिमिटेड, डिपार्टमेंट ई-कॉमर्स, D-28 इंडस्ट्रियल एरिया, नियर इनकम टैक्स ऑफिस, हरिद्वार, उत्तराखंड, 249401 दिया गया है।

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