FATF ने पाकिस्तान को दी चेतावनी के साथ मोहलत, नहीं होगा ब्लैक लिस्ट, जानिए पूरा मामला।

पाकिस्तान अगर टेरर फंडिंग (आतंकवादियों के वित्त पोषण) और मनी लॉन्ड्रिंग (धनशोधन) जैसे कुकर्म को अगर रोकने में नाकाम होता है, तो उसे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। जी हां आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान को करारा झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को रोकने वाली संस्था फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की रिव्यू मीटिंग में पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी गई।

पाकिस्तान नहीं सुधरता है तो FATF की डार्क ग्रे लिस्ट में जा सकता है। वो पहले से ही ग्रे लिस्ट में है। FATF की डार्क ग्रे लिस्ट में जाने का मतलब है कि अगर पाकिस्तान टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को नहीं रोकता है तो वो ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।

कैसे काम करता है FATF?
FATF एक स्वतंत्र इंटर गवर्नमेंट बॉडी है। इसका काम ग्लोबल फायनेंसियल सिस्टम की नीतियों की रक्षा करना और इसे बढ़ावा देना है। ताकि फायनेंसियल सिस्टम का इस्तेमाल आतंकी और एंटी सोशल एलिमेंट नहीं कर पाएं। FATF ग्लोबल फायनेंसियल सिस्टम को सही रखने के लिए नीतियां बना सकता है लेकिन वो किसी देश को अपनी रेटिंग सुधारने के लिए सलाह नहीं दे सकता। रेटिंग सही रखने की दिशा में काम उन देशों को ही करना है। FATF अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पॉलिसी बनाने वाली संस्था है। इसे कानून के लागू करने, जांच करने या आरोपित करने का अधिकार नहीं है।

पाकिस्तान को पहली बार 2012 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था।

कैसे हुआ FATF का गठन?
एक बाहुबली 36 राष्ट्रों का संगठन है, जिसे धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और आतंकवादियों के वित्त पोषण (टेरर फंडिंग) से निपटने और उनपर नजर रखने के लिए वित्तीय प्रतिबंधों को लागू करने की शक्ति के साथ 1989 में स्थापित किया गया।
 अक्टूबर 2001 में FATF ने अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार किया। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा टेरर फंडिंग और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकना और ऐसे मामलों पर नजर रखना शामिल किया गया।

FATF के पास कितने तरह के लिस्ट
FATF के पास मुख्य तौर पर दो लिस्ट होते हैं- ब्लैक लिस्ट और ग्रे लिस्ट। ब्लैक लिस्ट में उन देशों को डाला जाता है, जहां आतंकी गतिविधियों में पैसे का इस्तेमाल हो रहा है या फिर उन देशों में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले आ रहे हों। अगर कोई देश इन गतविधियों को रोकने की बजाय बढ़ावा दे रहा हो तो FATF उन्हें ब्लैक लिस्ट में डाल देती है। FATF साल 2000 से ब्लैक और ग्रे लिस्ट की जानकारी पूरी दुनिया को दे रहा है। ब्लैक लिस्ट में होने का मतलब है कि वो देश मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग से लड़ने में दुनिया के देशों के साथ सहयोग नहीं कर रहा है। FATF वक्त-वक्त पर ब्लैक लिस्ट को अपडेट करता रहता है।

ग्रे लिस्ट में कौन से देश शामिल होते हैं?
ग्रे लिस्ट में उन देशों को डाला जाता है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के लिए सेफ हेवन तो नहीं माने जाते लेकिन वहां ऐसी गतिवधियों के होने की जानकारी मिलती रहती है। ग्रे लिस्ट में डाले गए देशों के ब्लैक लिस्ट होने का खतरा बना रहता है। एक तरह से उन्हें एक चेतावनी दी जाती है ताकि वो टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों पर रोकथाम लगा सकें। ग्रे लिस्ट में गए देशों को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामलों को रोकना होगा। पाकिस्तान टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों से निपटने में नाकाम रहा है

डार्क ग्रे लिस्ट का मतलब क्या है?
डार्क ग्रे लिस्ट, ग्रे लिस्ट के बाद का खतरनाक स्तर है। ग्रे लिस्ट के देशों को दी गई एक और चेतावनी होती है। इसका मतलब है कि डार्क ग्रे लिस्ट में गए देश अपने यहां टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलो को गंभीरता से नहीं ले हैं, तो ऐसे देशों के ऊपर ब्लैक लिस्ट होने कि तलवार लटका दी जाती है। गौरतलब है कि इस लिस्ट में गए देशों को आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और एडीबी जैसे इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन से लोन मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे देशों के इंटरनेशनल ट्रेड पर बहुत बुरा असर पड़ता है। ऐसे देशों को अंतरराष्ट्रीय विरोध का सामना करना पड़ता है।

डार्क ग्रे लिस्ट में आने पर पाकिस्तान के साथ क्या होगा?
पाकिस्तान को पहली बार 2012 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था। तबसे लेकर 2015 तक ये इसी लिस्ट में रहा। 29 जून 2018 को पाकिस्तान को दूसरी बार ग्रे लिस्ट में डाला गया। इसकी प्रक्रिया फरवरी 2018 में ही शुरू हुई, उसके बाद से पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में है। भारत, अमेरिका और यूके चाहते हैं कि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डाला जाए। इन देशों की शिकायत है कि पाकिस्तान लगातार टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की अनदेखी कर रहा है। हालांकि इसके पहले चीन और तुर्की जैसे देश पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने का विरोध करते रहे हैं। पाकिस्तान को कहा गया था कि वो दुनिया के सामने प्लान लेकर आएं कि वो अपनी रेटिंग सुधारने के लिए क्या कर रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान ऐसा करने में नाकाम रहा। उसके डार्क ग्रे लिस्ट में जाने का खतरा बढ़ गया है। अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान की आर्थिक हालत और खस्ता हो जाएगी।

पाक को आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। दुनिया के देशों से उसे कर्ज मिलना मुश्किल हो जाएगा। आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन उसे कर्ज देना बंद कर देंगे। अब पाकिस्तान की इमरान सरकार को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों से निपटने में ईमानदार कोशिश दिखानी होगी। अगर पाकिस्तान ऐसा नहीं करता है तो उसे बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता।

ब्लैक लिस्ट में कौन-कौन से देश?
FATF कई देशों को ब्लैक लिस्ट में रख चुका है। इन देशों के साथ दुनिया के बाकी देश आर्थिक सहयोग नहीं रखते हैं। नॉर्थ कोरिया को FATF ने ब्लैक लिस्ट में रखा हुआ है। 2015 से ईरान को भी ब्लैक लिस्ट में रखा गया है। क्यूबा को ब्लैक लिस्ट में रखा गया है। उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। हालांकि हाल के वर्षों में उसने दुनिया के कई देशों से आर्थिक संबंध बनाए हैं।

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